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Toggleअष्टमेश का १२ भावों में फल
ज्योतिषशास्त्र में जन्मकुंडली के अष्टम भाव को अनिश्चितता एवं उतार-चड़ाव का भाव माना जाता हैं। इस भाव के स्वामी को अष्टमेश कहते हैं। अष्टमेश जातक के जन्मकुंडली के अलग-अलग भावों में उपस्थित होकर उनके भावानुसार अलग-अलग फल प्रदान करता है। जातक की रूचि अन्य कारकों के साथ इस बात पर भी निर्भर करता हैं जातक के जन्मकुंडली के भाव पर अष्टमेश क्या प्रभाव डाल रहा हैं।
आइये जानते हैं कि अष्टमेश का जातक के भावानुसार इसके क्या फल मिलते हैं।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का प्रथम भाव में फल:-
यदि जातक के जन्मकुंडली के प्रथम भाव में अष्टम भाव का अधिपति विराजमान हो तो ऐसा जातक बुद्धिमान और तार्किक होता है। जातक की माता जी बहुत सम्पन्न होती है। जातक का लगाव अध्यात्मिकता और उपचार से होता है लेकिन ऐसे जातक के ईश्वर की परिभाषा औरों से अलग ही होती है। जातक में शोध और छानबीन करने की क्षमता होती है। ऐसा जातक सरकारी जॉब में कार्यरत होकर सीक्यूरिटी और डीक्टेटिव जैसे गुप्त जॉब करने वाले हो सकते हैं। जातक को गुप्त स्त्रोत से जैसे की वसीयत या फिर दान से धन की प्राप्ति हो सकती है।
भाग्य भाव स्वामी का अन्य भावों में फल
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का द्वितीय भाव में फल:-
यदि अष्टम भाव का स्वामी जातक के जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक अपनी वाक्पटुता के कारण समाज में बहुत प्रिय होता है। जातक की माता को संतान से लाभ मिलता है। जातक का भाई उच्च पद प्राप्त करने वाला होता है। वाहन-मकान का सुख भोगेगा। जातक को सरकार से संबंधित मामलो में सहायता मिल सकती है।
यदि अष्टमेश पाप ग्रहों से पीड़ित हो और वह द्वितीय भाव में विद्यमान हो तो जातक की पत्नी अल्पायु हो सकती है। वह व्यक्ति बाहुबल रहित हो सकता है। जातक को अपने परिवार से परेशानी हो सकती है। जातक अपने परिवार से अलग होने के बारे में सोच सकता है। द्वितीय भाव भोजन का भाव भी होता है अगर अष्टमेश पीड़ित हो तो जातक को पौष्टिक भोजन में कमी हो सकती है अथवा हो सकता है कि धन की कमी के कारण जातक को पर्याप्त धन न मिले।
जातक चोर अथवा शत्रुओ से पीड़ित रहता है। जातक का गुप्त मृत्यु अथवा दुर्घटना भी हो सकता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का तृतीय भाव में फल:-
तृतीय भाव को यात्रा का भाव माना जाता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी जातक के जन्मकुंडली के तृतीय भाव में विद्यामान हो तो ऐसे जातक को अपने यात्रा में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जातक आमतौर पर यात्राएं करता रहता है। जातक का जीवन दीर्घायु होता है। जातक को अपने भाई से सुख मिलता है।
यदि अष्टम भाव का स्वामी पीड़ित हो और वह तृतीय भाव में विद्यमान हो तो ऐसे जातक शर्मीले होते हैं। जातक में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। जातक आलसी होता है तथा इनकी संकल्प शक्ति भी कमजोर होती है। जातक का अपने पिता से संबंध अच्छे नहीं होते होते हैं। जिससे जातक अपने पिता से बात करने में दिक्कत होती है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का चतुर्थ भाव में फल:-
चतुर्थ भाव अचल संपत्ति और चल संपत्ति का भाव का भाव होता है।अष्टम भाव यदि जातक के चतुर्थ भाव में विद्यमान हो तो ऐसे जातक को बार-बार घर बदलना पड़ सकता है।
जातक का मन अशांत रह सकता है। अपने मन को बहलाने के लिए जातक अशिष्ट कार्यों में प्रवृत हो सकता है। जातक की पत्नी आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती है।
लाभ भाव स्वामी का अन्य भावों में फल
जातक की माँ अक्सर बीमार रहा करती है। अथवा जातक माँ से वंचित हो सकता है।
अष्टमेश पाप ग्रहों से प्रभावित होने पर जातक का भाई अथवा बहन कर्जदार हो सकते हैं। जातक का पुत्र किसी मानसिक रोग से पीड़ित हो सकता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का पंचम भाव में फल:-
यदि जातक की जन्मकुंडली में अष्टम भाव का स्वामी पंचम भाव में उपस्थित हो तो जातक अल्प संपत्ति वाला धनवान होता है। जातक की रूचि इतिहास एवं गुप्त विद्याओ का ज्ञान रखने में होती है।
नौकरी के दौरान जातक का पद बार-बार बदलता रहता है। जातक का भाई अथवा बहन वर्दीधारी सेवाओ में हो सकते हैं। जातक के पिता लंबी यात्रा पर या विदेश जा सकते हैं।
जातक के पिता जी एकांत जीवन के लिए सांसारिक चिंताओ का त्याग कर सकते हैं।
अगर अष्टम भाव का स्वामी कोई पापी ग्रह हो और वह पंचम भाव में विद्यामान हो तो जातक जड़बुद्धि वाला और नासमझ होता है।
ऐसे जातक सट्टा व्यवसाय में शामिल होते हैं। परिवार को चलाने के लिए जातक की पत्नी को कम आय पर किसी के यहाँ काम करना पड़ सकता है।
अष्टमेश का पीड़ित हो और वह पंचम भाव में विद्यमान हो तो यह जातक के बच्चो के लिए अशुभ होता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का षष्ठम भाव में फल:-
षष्ठम भाव विवादों ,झगड़ा और प्रतियोगिता का भाव होता है। जन्मकुंडली में यदि अष्टम भाव का स्वामी षष्ठम भाव में विद्यमान हो तो ऐसा जातक प्रतिद्वंदियो पर विजय प्राप्त करने वाला होता है।
जातक जोखिम भरे पेशे में होता है जैसे कि पुलिसकर्मी,फायरमैन, आतंकवादी आदि। जातक को मुकदमेबाजी में सफलता मिलती है।
यदि अष्टम भाव का स्वामी ग्रह अशुभ हो और वह षष्ठ भाव में उपस्थित हो तो ऐसे जातक के प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओ में उतार-चड़ाव होता रहता है।
ऐसे जातक को बचपन में पानी और साँप से खतरा होता है। जातक आमतौर पर रोगी होता है लेकिन जातक का जीवन दीर्घायु होता है। जातक की पत्नी बहुत खर्चीली होती है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का सप्तम भाव में फल:-
जातक अष्टम भाव का अधिपति यदि जातक के सप्तम भाव में विद्यामान हो तो जातक का भाई या बहन खूब तरक्की करते हैं और समृद्धि प्राप्त करते हैं। जातक की माता पढ़ी-लिखी और विद्वान होती है।
जातक अच्छी कमाई करने वाला होता है।लेकिन जातक का व्यवहार बहुत अभद्र हुआ करता है। जातक का पिता भारी खर्च करता है। यदि अष्टमेश अशुभ स्थिति में हो और वह सप्तम भाव में विद्यमान हो तो जातक का अपनी पत्नी से द्वेष होता है।
ऐसे में जातक का अपनी पत्नी से तलाक हो सकता है और जातक का दूसरा विवाह भी हो सकता है। जातक के पिता की आय सीमित हो सकती है जिससे जातक अपने दोस्तो और परिजनो पर हो सकता है। जातक पेट से जुड़ी हुई किसी कष्ट से पीड़ित हो सकता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का अष्टम भाव में फल:-
यदि अष्टम भाव का स्वामी जातक के अष्टम भाव में ही स्थित हो जातक दीर्घायु और परिश्रमी होता है लेकिन ऐसा व्यक्ति विश्वसनीय नहीं होता है। जातक का स्वास्थ्य अच्छा होता है और वह अपने जीवन में समृद्धि और आनंद को प्राप्त करता है।
जातक के पिता जी धार्मिक स्वभाव के होते है है दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों में पैसे खर्च कटे रहते हैं जिससे उन्हे भारी खर्च का सामना करना पड़ता है। जातके के माता जी के पास ललित कला होती है तथा उनके पास संगीत की प्रतिभा भी होती है।
जातक को किसी माध्यम से गुप्त धन की प्राप्ति भी हो सकती है। जातक के बच्चे स्वस्थय होते है और शारीरिक सुख और संपत्ति और वाहन का सुख प्राप्त करते हैं।
जातक की पत्नी किसी प्रकार की नौकरी करती है जिससे वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती है। जातक के भाई का जीवन में अच्छा स्थान होता है।
अष्टमेश पीड़ित होने पर जातक की उम्र कम हो सकती है। पति-पत्नी के बीच निष्ठा संदिग्ध हो सकता है क्योकि पत्नी को लग सकता है कि मेरे पति का किसी और से संबंध है।
दशम भाव स्वामी का अन्य भावों में फल
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का नवम भाव में फल:-
अगर जातक के जन्मकुंडली में अष्टम भाव का स्वामी जातक के नवम भाव में उपस्थित हो तो जातक के बड़े भाई या बहन अपने पेशे से अच्छी कमाई कर सकते हैं।
ऐसे जातक स्वभाव से बहुत दुष्ट होता है। जातक का आचरण भी अच्छा नहीं होता है। जातक महापापी और नास्तिक होता है। जातक आमतौर पर दूसरे से धन ऐंठने वाला होता है।
अतः जातक का अपने पिता जी से अच्छे संबंध नहीं होते है। जातक का चेहरा बहुत विकृत होता है। जातक के शत्रु जातक से डरते हैं। ऐसा जातक अपने जीवन में असफल होता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का दशम भाव में फल:-
जन्मकुंडली के दशम भाव में अष्टम भाव का स्वामी उपस्थित होने पर जातक को विरासत में धन मिलने की संभावना है। जातक सरकार का कर्मचारी हो सकता है। ऐसा जातक किसी गुप्त विद्या का धनी हो सकता है।
यदि जातक की जन्मकुंडली में अष्टमेश पीड़ित हो और वह दशम भाव में विद्यामान हो तो ऐसे जातक स्वभाव से आलसी और चुगलखोर होते हैं। जातक नौकरी गवा सकते है या फिर जातक का किसी दूसरी जगह स्थानांतरण हो सकता है।
जातक पर किसी तरह के हेराफेरी का दोषी ठहराया जा सकता है। इसके लिए जातक को सरकार दंडित भी कर सकता है। जातक के पिता को भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। जातक को आरामदायक जीवन नहीं मिलता है। माता-पिता से जातक के अच्छे संबंध नहीं होते हैं।
धन भाव स्वामी का अन्य भावों में फल
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का एकादश भाव में फल:-
जातक की जन्मकुंडली में अष्टम भाव का स्वामी द्वादश भाव में विद्यामान हो तो ऐसे जातक का बचपन दुखमय और कठिन होता है। जातक युवावस्था में भी निर्धन होता है।
अंत मे जातक को गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में जातक का जीवन पूरी तरह से बदल सकता है। जातक सुखी और धनवान हो सकता है।
यदि अष्टमेश अशुभ ग्रह से पीड़ित हो और वह एकादश भाव में विद्यामान हो तो जातक का जनता के साथ झगड़ा हो सकता है। जातक के अपने ही उसके शत्रु बन सकते हैं। ऐसे जातक का किसी से गुप्त संबंध हो सकता है।
अष्टम भाव स्वामी अष्टमेश का द्वादश भाव में फल:-
यदि जातक की जन्मकुंडली में अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में उपस्थित हो तो जातक को विदेश यात्राओ का लाभ मिलता रहता है। जातक को सपने में कोई भूत का भ्रम या कोई असामान्य चीज देखने को मिल सकती है।
जातक के छोटे भाई या छोटी बहन को अपने जीवन में असफलता का सामना करना पड़ सकता है जबकि जातक के बड़े भाई या बड़ी बहन अच्छी कमाई कर सकते हैं। जातक को किसी तरह से गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है। जातक की माँ धार्मिक स्वभाव और ईश्वर भक्त होती है।
यदि जातक की जन्मकुंडली में अष्टमेश पीड़ित हो और वह द्वादश भाव में स्थित हो तो जातक का जीवन अल्पकालिक होता है। वह जातक कटुभाषी हो सकता है। जातक अपने पैसे को नीच कार्यों में खर्च करता है। जातक का एक से अधिक स्त्रियों से संबंध हो सकता है।
सप्तम भाव स्वामी का अन्य भावों में फल
अष्टमेश का कुंडली के बारह भावों में फल (निष्कर्ष)
जन्म कुंडली के अष्टम भाव के स्वामी अष्टमेश का कुंडली के बारह भावों में , विभिन्न भाव के अनुसार अलग-अलग फल मिलता है। आपने जाना कि आपको इसका अच्छा (सकारात्मक) फल भी मिल सकता है और नकारात्मक भी मिल सकता है।
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